Monday, 2 May 2016

काश !!


काश थाम सकते हम ,
ज़िन्दगी के कुछ अनमोल पल।

वो किसी का अचानक मिल जाना ,
जैसे हो जमाने से बिछड़े हुए।

वो सूरज की पहली किरण ,
जैसे ताजगी भर दे हर सांस में।

वो अल्हर सावन की छटा,
जैसे बादलों में चाँद छुपा हो।

वो बरखा की पहली बूंद,
जैसे सोंधी मिटटी की खुशबु लिए।

वो मदमस्त बरसात की रात ,
जैसे थिरकने को मजबूर कर दे।

वो पूस की कुहरे वाली ठंढी रात ,
जैसे कपकपाते हाथ अंगीठी लिए ।

वो खूबसूरत बसंत की बहार ,
जैसे हर खेत खिले हो सरसों के फूल ।

वो हर त्योहार में सबका मिलना जुलना ,
जैसे रंग भरे हो होली-दिवाली ।

काश ! थाम सकते हम ,
ज़िन्दगी के कुछ अनमोल पल ।

Friday, 13 May 2011

वक़्त से कौन कहे

वक़्त से कौन कहे ,यार ज़रा आहिस्ता चल,

अभी कुछ पल और बिताने दे,

न जाने कब बिखर जाये ये मंज़र,

कुछ और यादों के गुलदस्ते बनाने दे |


याद है वो वक़्त

किसी रोज़ शाम के वक़्त ,वो अपट्रान की दुकानें ,और गंगा की लहरें ,

और किसी रोज़ 'सूरज' की पहली किरणों को लपेटे वो नैनी ब्रिज ,

कभी दोस्तों के संग ,सिविल लाइन की सैर ,

तो कभी रात के अँधेरे में भी , कार्ड्स का गेम ,


कभी क्लास का वक़्त, गुजारने का जंग,

तो कभी क्लास छोड़कर ,वो क्रिकेट का मैच ,

अक्सर परीक्षा के दो दिन पहले ,पढने का रंग,

तो कभी-कभी मेस के खाने (अच्छे) देखकर दंग,

याद है वो वक़्त


लिख रहा हूँ आज ,ये भी वक़्त का ही तकाजा है ,

दिल में अभी भी सारी यादें ताज़ा-ताज़ा है ,

गिर पड़ते हैं आंसू ,उन लम्हों को याद कर ,

लगता हैं कलम में स्याही कम, दर्द ज्यादा है |


गर नही ज्यादा तो ये 'वक़्त - ए - रुखसत' ही ज़रा देर रहे ,

ना जाने फिर कब ये ख्वाब , ये पल रहें ,

हमारी तो बस यही इन्तहा है ए मेरे दोस्त ,

कि दूर तन्हाई में भी, बस तुम्हारा साथ रहे |


छोड़ो....वक़्त से कौन कहे ,यार ज़रा आहिस्ता चल |

Friday, 12 February 2010

पीना मानो उन्हें ज़िन्दगी सा लगता है..

पीना मानो उन्हें ज़िन्दगी सा लगता है ,
औरों की ज़िन्दगी उन्हें बेकसी सा लगता है ,
पीने के इंतज़ार में सारी ज़िन्दगी गुजर गयी ,
आज फिर दिल है टूटा,पर पैमाना अच्छा लगता है |

पीने वालों से पूछो , है चीज क्या पीना..!
जिसने पी नहीं शराब , उनका जीना क्या जीना ,
लोग नशे में झूम रहे , क्या कहती है तू ज़िन्दगी ,
दर्द भरे बाँहों में कैसे , रहती है तू ज़िन्दगी..!!

यह शब्द नहीं भावना है , ज़रा महसूस करके देखो,
यकीन न आये तो , पास के 'मैखाने' में जाकर देखो,
रात भर सारा मैखाना पी लो , होश ठिकाने आ जाएगी ,
फिर जाम-पे-जाम पीने से क्या फायदा , जब सुबह उतर जाएगी ..!!

' शायरी दोस्त ' ,' बेवफा शराब ' , और क्या-क्या बताएं ज़नाब ,
हम तो जी रहे हैं पर , न जाने उनका क्या होगा क्या पता,
यारों के संग बैठे थे पास के 'मैखाने' में ,
वो बेखबर मदहोश दीवाने थे ,छलकते पैमाने के |

Thursday, 2 April 2009

ज़िन्दगी 'खास है'

ज़िन्दगी सबके लिए खास है, फिर भी बकवास है ,
लाख ठोकर खाकर भी ,सदा जीने की आस है |

कहीं कोई सोच में डूबा , तो कोई बिंदास है ,
सब कुछ कर देने के बाद भी , होता न कुछ भी आभास है ,
क्यूंकि सबकी सोच का , अपना अलग ही अंदाज़ है ,
जैसे कि ज़िन्दगी सबके लिए खास है , फिर भी बकवास है |

जवानों को हर घड़ी , सुनाई देती एक आवाज़ है ,
हमेशा रहो तैयार , न जाने कब आघात है ,
दुश्मनों का अपने ऊपर , कुछ ऐसा ही ख़यालात है ,
क्यूंकि ज़िन्दगी सबके लिए खास है , फिर भी बकवास है |